इमरजेंसी के 50 साल पूरे, कांग्रेस बोली अघोषित आपातकाल के 11 साल, 5 प्वॉइंटर्स में समझाया

भारतीय जनता पार्टी आज आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर संविधान हत्या दिवस मना रही है. इसके साथ ही बीजेपी के तमाम नेताओं ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है. इस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए बीजेपी के 11 साल के कार्यकाल को अघोषित आपातकाल बताया है. कांग्रेस ने दावा किया कि देश में बेलगाम नफरती भाषण दिए जा रहे हैं और आम जनता के अधिकारों का दमन किया जा रहा है.

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बीते 11 सालों से देश में अघोषित आपातकाल लागू है. भारतीय लोकतंत्र पर व्यवस्थागत और खतरनाक तरीके से पांच गुना ज्यादा हमला किया जा रहा है, जिसे अघोषित आपातकाल कहना सही होगा.

 

जांच एजेंसियों का हो रहा गलत इस्तेमाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि मोदी सरकार में संविधान पर हमले हो रहे है, राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. संसदीय परंपराओं को तार-तार किया जा रहा है, न्यायपालिका को कमजोर किया जा रहा है और अब निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लग चुके हैं.

प्रदर्शन करने वालों को बताया जा रहा खालिस्तानी

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ‘सरकार की आलोचना करने वालों को बदनाम किया जा रहा है. सत्ता में बैठे लोगों की तरफ से नफरत और कट्टरता फैलाई जा रही है. प्रदर्शन करने वाले किसानों को खालिस्तानी करार दिया जा रहा है और जाति जनगणना की मांग करने वालों को शहरी नक्सली बताया जा रहा है.

गांधी के हत्यारों का हो रहा महिमामंडन

जयराम रमेश ने कहा कि पिछले 11 सालों और 30 दिनों में ‘महात्मा गांधी के हत्यारों का महिमामंडन किया जा रहा है, अल्पसंख्यक डर में जी रहे हैं. दलित और अन्य हाशिए पर पड़े वर्गों पर निशाना साधा जा रहा है, मंत्री नफरती भाषण दे रहे हैं और उसके बदले में इन लोगों को इनाम भी दिया जा रहा है.

केंद्र और राज्य के संबंध बिगाड़े

मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने केंद्र और राज्यों के संबंधों को बिगाड़ा है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने विपक्षी नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को गिराने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया. केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक राजकोषीय व्यवस्थाओं को दरकिनार कर उपकर का जरूरत से ज्यादा उपयोग करते हुए राज्यों को उनके वैध राजस्व हिस्से से वंचित कर दिया गया.

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